अर्चना तिवारी का रहस्यमयी लापता होने का मामला 7 दिन बीत गए अब भी कोई सुराग नहीं
मध्यप्रदेश के कटनी ज़िले की रहने वाली 29 वर्षीय अर्चना तिवारी जो भोपाल में रहकर सिविल जज बनने की तैयारी कर रही थीं पिछले हफ़्ते अचानक ट्रेन के एसी कोच से लापता हो गईं आज (14 अगस्त) को सात दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं है यह घटना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक पहेली बन चुकी है।
अर्चना ट्रेन के एसी कोच से रहस्यमयी गुमशुदगीघटना की शुरुआत – नर्मदा एक्सप्रेस की वो रात
7 अगस्त की रात अर्चना इंदौर से बिलासपुर जाने वाली नर्मदा एक्सप्रेस (18233) के एसी कोच B-3 में सफ़र कर रही थीं। कटनी से भोपाल के बीच सफर सामान्य था। सहयात्रियों ने बताया कि वह अपनी बर्थ पर शांत बैठी थीं और मोबाइल फोन पर समय-समय पर देख रही थीं ट्रेन जब नर्मदापुरम के पास पहुँची तो अचानक वह सीट पर नज़र नहीं आईं चौंकाने वाली बात यह थी कि उनकी बर्थ पर बैग रखा मिला जिसमें कपड़े और पढ़ाई का सामान था। मोबाइल फोन सीट पर नहीं था।
मोबाइल की अंतिम लोकेशन और नदी में खोजबीन
तकनीकी जांच में पता चला कि अर्चना के मोबाइल की अंतिम लोकेशन नर्मदा नदी के पुल पर मिली। यह वही समय था जब ट्रेन नर्मदापुरम के पास से गुजर रही थी लोकेशन मिलने के बाद SDRF, होमगार्ड और पुलिस की टीम ने नर्मदा नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया ड्रोन कैमरों नावों और गोताखोरों की मदद से कई किलोमीटर क्षेत्र खंगाला गया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला सर्च के दौरान न तो मोबाइल मिला न ही किसी तरह का कपड़ा या अन्य सामान जो गिरा हो।
अर्चना तिवारी — ट्रेन के एसी कोच से रहस्यमयी तरीके से लापता, 7 दिन बाद भी सुराग नहीं
परिवार की आशंकाएं
घटना की सूचना मिलते ही अर्चना का परिवार भोपाल पहुँचा परिजनों का कहना है कि अर्चना का स्वभाव बेहद संयमी और लक्ष्य-केन्द्रित था उनकी बड़ी बहन ने मीडिया से कहा हमारी बहन अपनी पढ़ाई और करियर में पूरी तरह लगी हुई थी उसने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया जिससे लगे कि वह खुद से कहीं चली जाएगी। हमें लगता है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि साज़िश है परिवार का यह भी मानना है कि अगर वह खुद ट्रेन से उतरी भी हों, तो किसी मजबूरी या दबाव में ही उतरी होंगी भोपाल GRP, RPF और कटनी पुलिस इस केस में मिलकर काम कर रहे हैं। पुलिस ने जांच के चार मुख्य एंगल बनाए हैं:
- दुर्घटना – चलती ट्रेन से गिरना या पुल से फिसलना।
- आत्महत्या – मानसिक तनाव या किसी व्यक्तिगत कारण से कदम उठाना।
- अपराध/अगवा – किसी ने योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया हो।
- स्वेच्छा से गायब होना – किसी कारणवश खुद को छुपा लेना।
भोपाल GRP के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया
हम तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज ट्रेन के स्टाफ और यात्रियों के बयान के आधार पर जांच कर रहे हैं नदी में तलाशी जारी है और आसपास के गांवों में भी पूछताछ हो रही है हम हर संभावना पर काम कर रहे हैं मामले में उलझन बढ़ाने वाले पहलू इस घटना में कई ऐसे बिंदु हैं जो पुलिस के लिए उलझन पैदा कर रहे हैं अर्चना का बैग उमरिया में मिला जबकि मोबाइल लोकेशन नर्मदापुरम में थी यानी दोनों जगहें अलग-अलग हैं यात्रा से पहले वह अपने हॉस्टल से निकलते समय किसी को कॉल कर रही थीं लेकिन उस कॉल की डिटेल अभी सार्वजनिक नहीं हुई है ट्रेन में बैठे यात्रियों को किसी झगड़े बहस या चीख-पुकार की आवाज़ सुनाई नहीं दी।
सोशल मीडिया और समाज की भागीदारी
यह मामला सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गया है ट्विटर (X) और फेसबुक पर FindArchanaTiwari ट्रेंड कर रहा है कटनी और भोपाल के कई सामाजिक संगठनों ने पोस्टर और मैसेज के ज़रिए लोगों से सूचना देने की अपील की है यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने घोषणा की है कि अर्चना का पता बताने या उसे सुरक्षित घर लाने वाले को ₹51,000 का इनाम दिया जाएगा अर्चना तिवारी कटनी में पली-बढ़ी और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं। स्नातक के बाद उन्होंने भोपाल में रहकर सिविल जज की तैयारी शुरू की। दोस्तों के अनुसार वह मेहनती और मिलनसार थीं, और अक्सर
सोशल मीडिया पर पढ़ाई से जुड़ी पोस्ट डालती थीं।
पुलिस अब रेलवे ट्रैक नर्मदा पुल के दोनों छोर और आसपास के गांवों में गवाह तलाश रही है सीसीटीवी फुटेज से पता लगाया जा रहा है कि ट्रेन के उस हिस्से में आखिरी बार कौन आया-जाया था अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 घंटे केस में अहम मोड़ ला सकते हैं अर्चना तिवारी की गुमशुदगी अब सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय बन चुकी है। परिवार, पुलिस और जनता की उम्मीद बस एक ही है — कि अर्चना सुरक्षित मिल जाएं और इस रहस्य से पर्दा उठे।
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