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सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर भी दहेज़ का शिकार शिल्पा की दर्दनाक कहानी

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सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर भी दहेज़ का शिकार शिल्पा की दर्दनाक कहानी


यह दर्दनाक घटना कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में सामने आई है यहाँ 27 वर्षीय शिल्पा बी पंचांगमठा जो एक बड़ी आईटी कंपनी Infosys में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थीं ने अपनी जान दे दी घटना 29 अगस्त 2025 को उजागर हुई और पूरे देश को हिला गई। 

शिल्पा एक प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
        शादी के बाद दहेज़ और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या की

कौन थीं शिल्पा शादी और दहेज़ की शुरुआत

शिल्पा एक होनहार और मेहनती युवती थीं पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी हासिल की उनकी शादी लगभग ढाई साल पहले प्रवीन नामक युवक से हुई थी। शादी के बाद उनका एक बच्चा भी हुआ। परिवार और करियर दोनों को संभालते हुए शिल्पा हमेशा आगे बढ़ने की कोशिश करती रहीं लेकिन दहेज़ की कुप्रथा ने उनकी ज़िंदगी छीन ली शादी के समय शिल्पा के परिवार ने ₹15 लाख नकद 150 ग्राम सोना और कई घरेलू सामान दिए थे सामान्यत इतना दहेज़ ही सामाजिक बुराई है लेकिन यहीं पर बात खत्म नहीं हुई। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने और पैसे मांगने शुरू कर दिए।

प्रवीन की कहानी और पैसों की मांग

प्रवीन पहले Oracle जैसी नामी आईटी कंपनी में इंजीनियर थे लेकिन शादी के एक साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पानिपुरी का व्यवसाय शुरू कर दिया व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उन्होंने शिल्पा से और पैसे लाने का दबाव बनाया। परिवार पर लगातार ₹5 लाख की अतिरिक्त मांग का बोझ डाला गया।

यह कहानी दहेज़ प्रथा की गंभीरता को दर्शाती है।
              शिल्पा का दुखद निधन दहेज़ प्रथा के खतरनाक प्रभाव को उजागर करता है।

रंगभेद और मानसिक प्रताड़ना

शिल्पा को केवल दहेज़ की मांगों से ही नहीं बल्कि रंगभेद के तानों से भी गुज़रना पड़ा रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी सास अक्सर उन्हें कहती थी तुम काली हो  ऐसे ताने और अपमान ने शिल्पा की मानसिक स्थिति को और भी कमजोर कर दिया 28 अगस्त की रात शिल्पा का शव उनके घर में मिला पुलिस जांच में साफ हुआ कि वह लंबे समय से प्रताड़ना झेल रही थीं। इसके बाद उनके पति प्रवीन को गिरफ्तार कर लिया गया और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज़ उत्पीड़न और दहेज़ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज किया गया यह खबर सामने आते ही पूरे कर्नाटक में आक्रोश फैल गया। मुख्यमंत्री और महिला आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। लोगों का कहना है कि जब एक पढ़ी-लिखी कमाने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी दहेज़ की शिकार हो सकती है, तो आम महिलाओं की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है यह घटना हमें एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि दहेज़ प्रथा अब भी हमारे समाज को किस तरह खा रही है। शिक्षा, नौकरी, करियर सब कुछ होने के बावजूद भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं ज़रूरत है कि कानून और कड़े हों और समाज इस मानसिकता से बाहर आए शिल्पा की कहानी सिर्फ एक महिला की मौत नहीं है बल्कि यह उस हज़ारों लड़कियों की आवाज़ है जो दहेज़ की मार झेल रही हैं यह घटना हमें याद दिलाती है कि अगर समाज नहीं बदला तो ऐसी दुखद कहानियाँ बार-बार सुनने को मिलेंगी।

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