दिल्ली में सांसों पर संकट: आरकेपुरम में AQI 300 पार हवा बेहद खराब

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दिल्ली में सांसों पर संकट: आरकेपुरम में AQI 300 पार हवा बेहद खराब

दिल्ली में प्रदूषण का संकट एक बार फिर गहराता जा रहा है। सर्दी का मौसम शुरू होते ही हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती दिख रही है और हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई इलाकों में लोगों के लिए खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। राजधानी के आरकेपुरम इलाके में शनिवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार दर्ज किया गया  जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण PM2.5 और PM10 इतनी मात्रा में बढ़ गए हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों बच्चों और सांस की बीमारी वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है।

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 300 पार, आरकेपुरम में हवा बेहद खराब
                                     दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 300 पार, आरकेपुरम में हवा बेहद खराब

दिल्ली के कई इलाकों में AQI 280 से 350 के बीच

दिल्ली के अधिकतर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर तेजी से ऊपर जा रहा है। सिर्फ आरकेपुरम ही नहीं, बल्कि आनंद विहार, पंजाबी बाग, आईटीओ, अशोक विहार और द्वारका जैसे कई क्षेत्रों में AQI लगातार 280 से 350 के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, हवा में ठहराव, तापमान में गिरावट और वाहन उत्सर्जन इस खराब स्थिति के बड़े कारण हैं। सर्दियों में हवा की गति धीमी हो जाती है, जिससे प्रदूषण ऊपर उठ नहीं पाता और घने स्मॉग के रूप में दिल्ली की हवा में जम जाता है।

बढ़ते प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर के AQI में आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने सुबह और देर शाम की सैर, बाहर कसरत करने और बिना मास्क बाहर निकलने से बचने की अपील की है। अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या पिछले कुछ दिनों में noticeably बढ़ी है। कई लोगों को खांसी, सीने में भारीपन और अस्थमा के अटैक की शिकायत बढ़ी हुई मिली है।

GRAP लागू होने की संभावना, सरकार की सख्ती बढ़ी

दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने हालात की निगरानी तेज कर दी है। यदि प्रदूषण इसी स्तर पर बना रहा, तो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत और कड़े कदम लागू किए जा सकते हैं। इसमें निर्माण कार्य पर रोक, ट्रकों की एंट्री सीमित करना, पानी का छिड़काव बढ़ाना और स्कूलों के लिए ऑनलाइन मोड जैसे अस्थायी कदम भी शामिल हो सकते हैं। कुछ इलाकों में नगरपालिका द्वारा सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है।

                      दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग और धुंध की समस्या गंभीर                              वाहन उत्सर्जन और पराली जलाने से राजधानी की हवा जहरीली

वाहनों और मौसम ने बिगाड़ी दिल्ली की हवा

वाहनों का भारी दबाव भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में निजी गाड़ियों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि हर सर्दी में हवा अपने आप ही खराब हो जाती है। ऊपर से पराली जलाने की समस्या, औद्योगिक धुआँ, निर्माण कार्य और मौसम का प्रभाव मिलकर राजधानी को गैस चैंबर जैसा बना देते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि बाहर जाते समय N95 या KN95 मास्क अनिवार्य रूप से पहनें, खिड़कियां बंद रखें, एयर-प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और बच्चों को दूर तक बाहर खेलने से रोका जाए। जिन लोगों को दमा, हृदय रोग या फेफड़ों की बीमारी है, उन्हें दवाइयाँ अपने साथ रखने और मौसम बदलते ही डॉक्टर से नियमित चेकअप कराने की सलाह दी गई है।

अगले दिनों में राहत की उम्मीद कम हवा और  बिगड़ सकती है

दिल्ली में प्रदूषण की यह समस्या हर साल सर्दियों में चरम पर पहुँच जाती है और इस बार भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। फिलहाल हवा में सुधार के आसार बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक हवा की गति कम रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण और नीचे बैठ सकता है। ऐसे में राजधानी के लिए आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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