अपर्णा यादव का बयानअगर राम के नाम की योजनाएं नहीं होंगी क्या अल्लाह के नाम चलेगी?

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अपर्णा यादव का बयानअगर राम के नाम की योजनाएं नहीं होंगी क्या अल्लाह के नाम चलेगी?

उत्तर प्रदेश के भदोही में शनिवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव ने एक विवादित बयान दिया जिसने राजनीतिक और सामाजिक जगत में तेज़ चर्चा पैदा कर दी है। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद अपर्णा यादव ने कहा कि अगर देश में राम के नाम की योजनाएं नहीं चलेंगी तो क्या अल्लाह के नाम पर योजनाएं चलाई जाएँगी क्या अपर्णा यादव ने भदोही हिंदू सम्मेलन में विवादित बयान दिया,

                          राम के नाम की योजनाओं पर विवाद अल्लाह के नाम पर बहस तेज़

भदोही हिंदू सम्मेलन में बयान का संदर्भ

भदोही में आयोजित इस सार्वजनिक सभा में अपर्णा यादव ने हिंदुत्व और धार्मिक पहचान के मुद्दे पर जोरदार भाषण दिया उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे आदर्श हैं और जब देश राम के नाम से जुड़े कार्यक्रम और योजनाएं चलाता है तो उस पर आपत्ति क्यों जताई जाती है उन्होंने यह भी पूछा कि यदि राम के नाम की योजनाएं नहीं होंगी तो क्या अल्लाह के नाम पर योजनाएं चलेंगी अपर्णा यादव ने हिंदू समाज को एकजुट रहने और सामाजिक सुरक्षा के लिए सतर्क रहने का संदेश भी दिया उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ कथित अत्याचार का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे समय में हिंदू समाज को संगठित रहने की ज़रूरत है। 

राम के नाम पर योजनाओं को लेकर क्या कहा गया?

अपर्णा ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे और बटेंगे तो कटेंगे उन्होंने यह भी कहा कि यह राम युग है और ऐसी स्थिति में योजनाओं और नीतियों में राम के नाम का होना स्वाभाविक है उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाओं को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए हिंदू समाज को सजग रहने की अपील की और कहा कि यदि समाज की रक्षा के लिए शस्त्र उठाना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

विपक्षी दलों ने उनके बयान पर टिप्पणी की है और यह मुद्दा धार्मिक पहचान और राजनीति के संगम के रूप में उभर रहा है भाजपा समर्थक वर्ग इसे भारतीय संस्कृति और धार्मिक पहचान की रक्षा का बयान मान रहा है वहीं आलोचक इसे धर्म को राजनीति में जोड़ने की कड़ी के रूप में देख रहे हैं समाजवादी पार्टी समेत कुछ राजनीतिक दलों ने बयान का विरोध किया है और कहा है कि धार्मिक भावनाओं का राजनीतिकरण देश में सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है जिसमें कुछ लोग उनके समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं और कुछ आलोचना कर रहे हैं RamNamedSchemes और AparnaYadav जैसे हैशटैग चर्चा में हैं कुछ उपयोगकर्ताओं का कहना है कि देश की योजनाओं को धार्मिक पहचान से जोड़ा जाना संवेदनशील मुद्दा है जबकि आलोचक इसे समाज में भेदभाव बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं।

धर्म और राजनीति की संवेदनशील दूरी

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और नीतियों या योजनाओं के नामकरण को धार्मिक पहचान से जोड़ना अक्सर विवाद का विषय रहा है ऐसे बयान सामाजिक एकता और संवैधानिक तटस्थता के बीच संतुलन को चुनौती देते हैं विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक भावना और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देना आवश्यक है लेकिन यह भी ज़रूरी है कि योजनाएं सबके समान अधिकार और अवसर पर आधारित हों राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपर्णा यादव का बयान आगामी चुनावी संदर्भ में धर्म‑राजनीति की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है खासकर जब देश में राम नाम को लेकर बहस पहले से ही गर्म है भदोही हिंदू सम्मेलन में अपर्णा यादव का बयान अगर राम के नाम की योजनाएं नहीं होंगी क्या अल्लाह के नाम चलेगी न केवल सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा कर रहा है।

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