Aravalli Range पर बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा से क्यों मचा बवाल

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Aravalli Range पर बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा से क्यों मचा बवाल

भारत की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में गिनी जाने वाली अरावली रेंज (Aravalli Range) एक बार फिर सुर्खियों में है वजह है सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला जिसमें अरावली पहाड़ियों को लेकर नई परिभाषा तय की गई है इस फैसले के बाद देशभर में पर्यावरणविदों सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच बहस छिड़ गई है सवाल उठ रहा है कि क्या यह फैसला अरावली के संरक्षण को कमजोर करेगा और क्या इससे दिल्ली-एनसीआर व राजस्थान के पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा

अरावली रेंज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नई परिभाषा से मचा बवाल।
                           अरावली रेंज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला नई परिभाषा से मचा बवाल।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है नया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज को लेकर यह स्पष्ट किया है कि केवल वही पहाड़ी क्षेत्र अरावली माने जाएंगे जिनकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक है इस नई परिभाषा का सीधा मतलब यह है कि अरावली के कई ऐसे हिस्से जो इससे कम ऊंचाई के हैं अब आधिकारिक रूप से अरावली के दायरे से बाहर हो सकते हैं विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से वंचित हो सकता है। इस फैसले के सामने आते ही सोशल मीडिया पर SaveAravalli जैसे अभियान तेज हो गए पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नई परिभाषा से अरावली की करीब 80 से 90 प्रतिशत पहाड़ियां संरक्षित सूची से बाहर चली जाएंगी उनका मानना है कि इससे खनन निर्माण कार्य और अवैध कब्जों को बढ़ावा मिल सकता है जो पहले से ही अरावली के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।

अरावली का पर्यावरण में क्या महत्व है

अरावली रेंज सिर्फ पहाड़ियों का समूह नहीं है बल्कि यह उत्तर भारत के पर्यावरण के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है यह दिल्ली-एनसीआर को रेगिस्तान की धूल भरी हवाओं से बचाती है भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करती है वन्यजीवों और जैव विविधता का बड़ा केंद्र है तापमान संतुलन और बारिश के पैटर्न में भी इसकी अहम भूमिका मानी जाती है अगर अरावली कमजोर होती है तो इसका सीधा असर प्रदूषण पानी की कमी और जलवायु असंतुलन के रूप में सामने आ सकता है।

 Aravalli Range फैसले पर राजनीति गरमाई

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है कई नेताओं ने इसे पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया है वहीं कुछ का कहना है कि इससे विकास कार्यों को स्पष्ट दिशा मिलेगी राजस्थान और हरियाणा के कई इलाकों में स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं ग्रामीणों का कहना है कि अरावली के खत्म होने से उनका जीवन खेती और पानी के स्रोत प्रभावित होंगे अरावली जैसी प्राचीन पर्वतमाला को सिर्फ ऊंचाई के आधार पर परिभाषित करना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है उनके अनुसार अरावली का महत्व उसकी भौगोलिक संरचना वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा है न कि केवल ऊंचाई से इसलिए इस फैसले पर दोबारा विचार की मांग उठ रही है।

अरावली संरक्षण पर बढ़ी चिंता सरकार के फैसले का इंतजार

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग इस फैसले के बाद क्या कदम उठाते हैं अगर संरक्षण के वैकल्पिक उपाय नहीं किए गए तो अरावली रेंज का बड़ा हिस्सा भविष्य में विकास और खनन की भेंट चढ़ सकता है पर्यावरण संगठनों ने मांग की है कि अरावली के संरक्षण के लिए अलग और सख्त नीति बनाई जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे बचाया जा सके Aravalli Range पर सुप्रीम कोर्ट का यह बड़ा फैसला सिर्फ कानूनी मामला नहीं बल्कि पर्यावरण और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है नई परिभाषा से मचा बवाल इस बात का संकेत है कि लोग अरावली को लेकर चिंतित हैं अब जरूरत है संतुलन कीजहां विकास भी हो और प्रकृति का संरक्षण भी बना रहे।

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