CM योगी के कयामत तक बयान पर हुमायूं कबीर का जवाब सोशल मीडिया पर वायरल
राजनीति में जब कोई बड़ा बयान आता है तो उसका असर सिर्फ न्यूज़ चैनलों तक सीमित नहीं रहता वो सोशल मीडिया तक तेजी से पहुंच जाता है कुछ ऐसा ही हुआ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कयामत तक वाले बयान पर टीएमसी नेता हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया दी उनका जवाब देखते ही देखते वायरल हो गया और हर प्लेटफॉर्म पर बहस का मुद्दा बन गया।
CM योगी का कयामत तक बयान चर्चा में।
हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक मंच से बयान दिया।
हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दिया जिसे लेकर सियासी हलकों में हलचल मच गई बयान में उन्होंने कयामत तक जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिससे विपक्ष ने इसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों एंगल से लिया इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता हुमायूं कबीर ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी भी नेता को ऐसे शब्दों का प्रयोग सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा राजनीति में बयानबाज़ी हो सकती है लेकिन धर्म और भावनाओं को जोड़कर बोलना देश की एकता के लिए सही नहीं है उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया ट्विटर फेसबुक और यूट्यूब पर लोग इसे शेयर करने लगे कुछ लोग कबीर के समर्थन में उतरे तो कुछ ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया।
सोशल मीडिया पर कैसा रहा रिएक्शन?
सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं हुमायूं कबीर ने सही मुद्दा उठाया है राजनीति में भाषा की मर्यादा जरूरी है ये सिर्फ टीआरपी और लाइमलाइट के लिए है हर बात में धर्म घसीटना गलत है यानी मामला सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहा बल्कि डिजिटल डिबेट बन गया राजनीतिक मायने क्या हैं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में जनता को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए दिए जाते हैं लेकिन जब विपक्ष उसका जवाब देता है तो मुद्दा और भी बड़ा बन जाता है हुमायूं कबीर का जवाब यही दिखाता है कि अब नेता सिर्फ मंच से नहीं बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए भी जनता तक पहुंच रहे हैं।
बयानबाज़ी बनाम जिम्मेदारी
आज के दौर में नेताओं के हर शब्द का असर लाखों लोगों पर पड़ता है इसलिए राजनीतिक बयान सिर्फ भाषण नहीं होते बल्कि समाज की सोच को दिशा देते हैं सीएम योगी का बयान और हुमायूं कबीर की प्रतिक्रिया दोनों ने यह दिखाया कि राजनीति में शब्दों की ताकत कितनी बड़ी होती है आम लोगों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज है कुछ लोग इसे धार्मिक भावना से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक रणनीति मान रहे हैं कयामत तक जैसे शब्द बोलता है तो वो सिर्फ बयान नहीं बल्कि एक भावनात्मक संदेश होता है CM योगी के कयामत तक वाले बयान पर हुमायूं कबीर का जवाब सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था बल्कि ये दिखाता है कि आज की राजनीति में भाषा, भावनाएं और सोशल मीडिया तीनों मिलकर मुद्दे को बड़ा बना देते हैं ये मामला हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र में हर नेता को बोलने की आज़ादी है, लेकिन साथ में जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है
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