दिल्ली में बड़ा एक्शन निर्माण स्थलों पर 7 करोड़ का जुर्माना 48 साइटें सील

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दिल्ली में बड़ा एक्शन निर्माण स्थलों पर 7 करोड़ का जुर्माना 48 साइटें सील

दिल्ली की हवा लगातार खराब हो रही है और प्रदूषण के स्तर में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इस बार बेहद सख्त कार्रवाई की है। सरकार और DPCC की संयुक्त टीमों ने राजधानी के विभिन्न निर्माण स्थलों पर बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाया जिसमें पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया। नियमों को नजरअंदाज करने वालों पर सरकार ने 7 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया और 48 साइटों को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह अब तक का सबसे मजबूत एक्शन माना जा रहा है।

दिल्ली में निर्माण स्थलों पर भारी कार्रवाई, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया गया।
                           प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने 48 साइटों को तुरंत सील किया।

कड़े नियम कड़ी कार्रवाई सरकार ने साफ किया कि समझौता नहीं होगा

अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में 1,700 से अधिक निर्माण स्थलों की जांच की गई। निरीक्षण में पाया गया कि कई साइटों पर धूल नियंत्रण के लिए न एंटी-स्मॉग गन थी न ही निर्माण सामग्री को ढककर रखा गया था। पानी का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा था। गाड़ियों पर कवरिंग का कोई इंतजाम नहीं था और कई जगह मशीनों से उठ रही धूल को रोकने के लिए नेट भी नहीं लगाए गए थे। इन सभी गंभीर कमियों पर अधिकारियों ने मौके पर ही सख्त कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया।

48 साइटें सील नियम तोड़े तो काम तुरंत बंद

जहां गंभीर उल्लंघन मिले, वहां किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई। 48 निर्माण साइटों को तुरंत सील कर दिया गया। इन सभी साइटों पर तब तक कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकेगा, जब तक जिम्मेदार पक्ष सभी पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं करता। सरकार ने साफ कहा कि यह कार्रवाई किसी एक कंपनी या इलाके को टारगेट करके नहीं की गई। जहां भी नियम टूटते मिले वहां एक जैसा ही एक्शन लिया गया।

सर्दियों में बढ़ता प्रदूषण — क्यों जरूरी था यह कदम

दिल्ली में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता बेहद तेजी से गिरती है। पराली का धुआं वाहन प्रदूषण और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल हवा को और ज्यादा जहरीला बना देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों से होने वाला धूल प्रदूषण PM2.5 और PM10 स्तर को सबसे तेजी से बढ़ाता है। इसलिए निर्माण कंपनियों को नियमों का सख्ती से पालन करवाना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि यदि अभी कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

1,700 से अधिक साइटों का निरीक्षण कई को नोटिस कई को चेतावनी

अभियान के दौरान जिन 1,700+ साइटों की जांच की गई, उनमें से 556 साइटों को नोटिस जारी किया गया।
48 साइटों को सील किया गया और बाकी निर्माण स्थलों को सख्त चेतावनी देते हुए तुरंत सुधार करने का आदेश दिया गया।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां नियमों का उल्लंघन होगा, वहां कार्रवाई दोबारा होगी।

कंपनियों के लिए सरकार का संदेश नियम मानो या काम रोक दो

सरकार ने सभी बिल्डरों और ठेकेदारों को साफ-साफ चेतावनी दी है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है इसके लिए कंपनियों को निम्न इंतजाम रखना अनिवार्य है निर्माण स्थल पर एंटी-स्मॉग गन नियमित पानी का छिड़काव सामग्री को ढककर रखना गाड़ियों की सफाई और कवरिंग धूल रोकने के लिए नेट और बैरिकेडिंग सरकार ने कहा कि प्रोजेक्ट कितना बड़ा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता—उल्लंघन मिला तो कार्रवाई होगी।

प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार की नो कम्प्रोमाइज नीति

दिल्ली में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना और 48 साइटों का सील होना यह साफ दिखाता है कि सरकार अब प्रदूषण को लेकर बिल्कुल समझौता करने के मूड में नहीं है। नियम तोड़ने वाला चाहे निजी बिल्डर हो या सरकारी एजेंसी सबके लिए एक जैसा सख्त एक्शन होगा आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन कदमों का असर हवा की गुणवत्ता पर कितना पड़ता है, लेकिन इतना तय है कि इस कार्रवाई ने सभी निर्माण कंपनियों को सतर्क कर दिया है।

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