सोनम वांगचुक रिहा बाहर आए बोले लद्दाख को चाहिए पूर्ण राज्य दर्जा
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक सक्रियवादी सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है यह रिहाई नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत उनकी हिरासत को रद्द किए जाने के बाद हुई और उनके बयान ने फिर से लद्दाख के लोगों की पूर्ण राज्य दर्जा और छठी अनुसूची की मांगों पर राष्ट्रीय चर्चा शुरू कर दी है वांगचुक ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा चाहिए।
सोनम वांगचुक जेल से रिहा होकर बाहर आए।रिहाई कैसे और क्यों हुई?
सोनम वांगचुक लगभग छह महीने तक NSA के तहत हिरासत में रहे थे गृह मंत्रालय ने उनकी हिरासत को रद्द कर दिया जिसके तुरंत बाद वह जेल से रिहा हो गए सरकार ने इस कदम को शांति स्थिरता और संवाद के माहौल को बढ़ावा देने की कोशिश बताया है खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट में एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई चल रही थी इसका मतलब यह है कि शासन ने फैसला किया कि अब वार्ता और बातचीत अधिक आवश्यक है बजाय कठोर हिरासत के एनएसए हटाए जाने के साथ ही वांगचुक को जेल से छुट्टी मिल गई।
सोनम वांगचुक का बयान और संदेश
रिहाई के बाद वांगचुक ने पत्रकारों से कहा कि उनका संघर्ष हिंसात्मक नहीं बल्कि बातचीत पर आधारित रहा है उन्होंने स्पष्ट किया कि लद्दाख के लोग राज्य के विशेष दर्जे संवैधानिक सुरक्षा और लोक प्रशासन के अधिकार चाहते हैं ताकि उनकी जमीन संस्कृति और रोजगार का संरक्षण सुनिश्चित हो सके उन्होंने यह भी कहा कि जनता और सरकार दोनों को लचीला और तैयार होना चाहिए ताकि समस्या का समाधान मिले उनका कहना था कि हम केवल बात करना चाहते थे यही उनका मूल उद्देश्य था।
लद्दाख में आंदोलन ठंडा नहीं पड़ा
वांगचुक की रिहाई के बाद कुछ राहत का माहौल जरूर बना है पर लद्दाख में आंदोलन जारी है हज़ारों लोग लेह और कारगिल दोनों जिलों में सड़कों पर उतरे और उन्होंने राज्य के दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग फिर से दोहराई प्रदर्शनकारियों ने अपने इलाक़े की सांस्कृतिक पहचान संसाधनों पर नियंत्रण रोजगार सुरक्षित रखने और प्रशासनिक स्वायत्तता का आग्रह किया ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे लेकिन यह साबित करते हैं कि लद्दाख की जनता का मुद्दा सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं रहा।
आंदोलन अभी जारी है और जनता शांतिपूर्ण प्रदर्शनक्या है लद्दाख के लोगों की मांग?
लद्दाख के स्थानीय संगठन जैसे Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance कई वर्षों से केंद्र सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि लद्दाख को संवैधानिक रूप से राज्य का दर्जा दिया जाए जिससे स्थानीय प्रशासन और कानून बनाने की शक्ति मिले संविधान के छठे अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा और अधिकार मिलने चाहिए ताकि भूमि संसाधन और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे ये मांगें 2021 से कई बार बातचीत मार्च विरोध और अनशन के रूप में उठाई जाती रही हैं प्रदेश का 2019 में संविधान से अलग किया जाना और सीधा केंद्र शासित प्रदेश बनना भी इन सवालों का बड़ा कारण है।
पिछली घटनाओं का सिलसिला
पिछले साल सितंबर 2025 में एक हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत भी हुई थी उसी प्रदर्शन में वांगचुक की गिरफ्तारी हुई थी जिसे लेकर विवाद और राजनीतिक बहस भी चलती रही थी उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और हिंसा का दायरा कुछेक उग्र तत्वों तक सीमित था जबकि प्रशासन ने आरोप लगाया कि सुरक्षा और सार्वजनिक आदेश बनाए रखना ज़रूरी था।
सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्षी आवाज़ें
सोनम वांगचुक की हिरासत पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखी गई कुछ राष्ट्रीय नेताओं ने सरकार द्वारा NSA का इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए और कहा कि असहमति को कुचलने की बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए सरकार का कहना रहा है कि स्थिति नियंत्रण में रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए NSA हटाने के फैसले को अब बातचीत को आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है।
रिहाई बड़ी बात पर आंदोलन अभी बाकी है
सोनम वांगचुक की रिहाई एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन यह लद्दाख के लोगों की मूल मांग पूर्ण राज्य और संवैधानिक सुरक्षा का समाधान नहीं है विरोध अभी जारी है और अब चीज़ें सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत नीति निर्धारण और संवैधानिक ढांचे के भीतर निर्णय पर टिकी हैं लद्दाख की जनता अब शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों और पहचान की लड़ाई लड़ रही है और यह मुद्दा देश के राजनीतिक और संवैधानिक चर्चाओं में एक लंबा स्थान बना हुआ है।
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