किस्सा ऐसे IAS का जिसने गरीबी से IAS तक का सफर तय किया और फिर इस्तीफा दे दिया
उत्तर प्रदेश के रिंकू सिंह राही की कहानी उन लोगों के लिए बेहद प्रेरणादायक है जो अपने सपनों को पाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं राही का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ जहां उनके पिता आटा चक्की चलाते थे बचपन में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद राही ने कभी हार नहीं मानी उन्होंने कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय के साथ पढ़ाई जारी रखी और सरकारी सेवा में जाने का सपना देखा।
गरीबी से संघर्ष करके IAS बने रिंकू सिंह राही।UPSC पास करके IAS बनने वाले रिंकू सिंह राही ने क्यों किया इस्तीफा
छोटे शहर के संघर्ष और संसाधनों की कमी के बावजूद रिंकू सिंह ने UPSC परीक्षा पास करके IAS अधिकारी बनने का रास्ता तय किया यह सफर आसान नहीं था लेकिन उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया उनकी कहानी यह दिखाती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है IAS बनने के बाद राही की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए वे अपने प्रशासनिक कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी और लगन से निभाते थे एक समय ऐसा आया जब शाहजहांपुर में उनका उठक‑बैठक वाला वीडियो वायरल हुआ जिसमें उन्होंने स्थानीय वकीलों को अनुशासन सिखाया यह वीडियो सोशल मीडिया और न्यूज़ में तेजी से वायरल हुआ।
IAS पद से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह राही की वजहें और संघर्ष
इस घटना के बाद राही को प्रशासन में साइडलाइन कर दिया गया और उन्हें कोई सक्रिय पोस्टिंग नहीं दी गई। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और जिम्मेदारी को कभी नहीं छोड़ा उन्होंने लगातार कोशिश की कि जनता की सेवा और प्रशासनिक सुधार के लिए काम कर सकें 31 मार्च 2026 को रिंकू सिंह राही ने IAS पद से इस्तीफा दे दिया उन्होंने इस्तीफे के पीछे कई कारण बताए उनका कहना था कि उन्हें लंबे समय से कोई सार्थक पोस्टिंग या जिम्मेदारी नहीं मिली जबकि वेतन लगातार मिलता रहा राही ने यह भी लिखा कि प्रशासन में समानांतर व्यवस्था और अन्य बाधाओं के कारण उन्हें अपने उद्देश्य जनता की सेवा को पूरा करना मुश्किल हो रहा था उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वेतन तो ले रहे थे लेकिन काम नहीं कर पा रहे थे और यही कारण था कि उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना सही समझा यह निर्णय सिर्फ नौकरी छोड़ने के लिए नहीं था बल्कि अपने सिद्धांतों और ईमानदारी के लिए लिया गया एक बड़ा कदम था।
उद्देश्य और सिद्धांत के लिए इस्तीफा
ईमानदारी और नैतिकता सबसे महत्वपूर्ण हैं पद और प्रतिष्ठा केवल तभी मूल्यवान होती हैं जब हम अपने सिद्धांतों पर कायम रहें संघर्ष से सफलता संभव है चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों गरीबी और संसाधनों की कमी किसी की सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती सिस्टम में बाधाओं के बावजूद साहसिक निर्णय लेना ज़रूरी है राही ने यह दिखाया कि अपने उद्देश्य और सिद्धांतों के लिए खड़े होना महत्वपूर्ण है रिंकू सिंह राही का जीवन हमें यह सिखाता है कि संघर्ष और लगन से बड़े सपने सच हो सकते हैं लेकिन कभी-कभी सफलता पाने के बाद भी हमें अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता देनी पड़ती है उन्होंने IAS बनने के बाद भी अपने उद्देश्य से समझौता नहीं किया और अपने विश्वास के अनुसार इस्तीफा दिया यह कहानी केवल एक अधिकारी के इस्तीफे की नहीं है बल्कि कठिनाइयों के बावजूद नैतिकता ईमानदारी और जनसेवा का संदेश है राही ने दिखाया कि सफलता का असली मतलब केवल पद या पैसा नहीं है बल्कि अपने कर्तव्य और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा है।
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