लोकसभा में बड़ा बदलाव सीटें बढ़ाकर 850 की जा सकती हैं संसद के विशेष सत्र में आएगा बिल रिपोर्ट
भारतीय राजनीति में एक बड़ी खबर चर्चा में है कि लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती हैं रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्र सरकार इस पर एक बड़ा बिल संसद के विशेष सत्र में पेश कर सकती है हालांकि यह अभी प्रस्ताव और मीडिया रिपोर्ट्स के स्तर पर है लेकिन इस खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर बढ़ा दी है अगर ऐसा होता है तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
लोकसभा में बड़ा बदलाव की चर्चा तेजलोकसभा सीटें बढ़ाने की क्या है वजह?
लोकसभा में सीटें बढ़ाने की चर्चा कई कारणों से हो रही है सबसे बड़ा कारण भारत की बढ़ती जनसंख्या है 1950 के दशक में जब सीटों का निर्धारण हुआ था तब देश की जनसंख्या काफी कम थी लेकिन अब यह बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है इसी वजह से कहा जा रहा है कि हर नागरिक को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया भी इस बदलाव से जुड़ी हुई है।
क्या वास्तव में 850 सीटों का बिल आएगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार एक संविधान संशोधन बिल ला सकती है जिसके तहत लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाई जा सकती हैं इस बिल को संसद में चर्चा के लिए विशेष सत्र में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है हालांकि अभी तक किसी भी तरह का अंतिम फैसला नहीं हुआ है यह सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट्स और संभावित योजना के रूप में सामने आया है।
अगर लोकसभा सीटें बढ़ीं तो क्या बदलेगा?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है और लोकसभा सीटें 850 हो जाती हैं तो भारत की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं सबसे पहला बदलाव यह होगा कि हर सांसद के पास प्रतिनिधित्व करने के लिए अपेक्षाकृत कम क्षेत्र होगा जिससे वह अपने इलाके पर ज्यादा ध्यान दे सकेगा इसके साथ ही चुनावी रणनीतियां भी पूरी तरह बदल जाएंगी सरकार बनाने के लिए भी नए गणित बनेंगे क्योंकि बहुमत का आंकड़ा भी बढ़ जाएगा।
राजनीतिक दलों पर क्या असर पड़ेगा?
लोकसभा सीटों के बढ़ने से सभी राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर पड़ेगा बड़ी पार्टियों को नए क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनानी होगी जबकि क्षेत्रीय दलों के लिए भी नए मौके बन सकते हैं हालांकि यह भी माना जा रहा है कि चुनावी मुकाबला और ज्यादा कठिन और प्रतिस्पर्धी हो सकता है लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने की खबर अभी शुरुआती रिपोर्ट्स पर आधारित है लेकिन अगर यह लागू होती है तो यह भारत के लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।
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