बागपत में सनसनी डॉक्टर पर रेप का आरोप इंसाफ न मिलने पर परिवार पहुंचा DM ऑफिस
घटना का पूरा विवरण
मामला बिलौचपुरा गांव थाना सिंघावली अहीर क्षेत्र (बागपत) का है यहां एक युवती अपने इलाज के लिए क्लीनिक गई थी परिवार के अनुसार डॉक्टर इंतिजार ने युवती को नशे की गोली दी और फिर उसे अगवा कर हरियाणा ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया इस आरोप के बाद परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई लेकिन उन्हें लगता है कि पुलिस ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की परिवार का कहना है कि पुलिस और थानेदार ने आरोपी डॉक्टर को पकड़ने के बजाय ₹5 लाख रुपये लेकर मामले को गलत तरीके से निपटाने की कोशिश की इससे परिवार में गुस्सा और निराशा इतना बढ़ गया कि उन्होंने पेट्रोल की बोतल लेकर DM कार्यालय का रुख किया और आत्मदाह का प्रयास किया।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के दौरान जैसे ही परिवार आत्मदाह की कोशिश करने लगा मौके पर मौजूद SDM ज्योति शर्मा ने तुरंत हस्तक्षेप किया और परिवार के हाथ से पेट्रोल छीन लिया जिससे बड़ा हादसा टल गया प्रशासन ने कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरी जांच जारी है पुलिस ने यह भी बताया कि वे सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच करेंगे और अगर आरोप सही पाये जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कहा कि मुकदमा दर्ज है और जांच जारी है साथ ही पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया गया है कि उन्हें न्याय मिलेगा लेकिन परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें किसी भी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है जिस कारण उनकी निराशा चरम पर पहुंच गई।
न्याय और व्यवस्था पर उठते सवाल
इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को चौंकाया है बल्कि समाज और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं जब किसी गंभीर आरोप के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद police या lower स्तर की authorities से नहीं मिलती तो वे मजबूर होकर उग्र कदम उठाने पर विचार करने लगते हैं विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत और पारदर्शी कार्रवाई की आवश्यकता होती है ताकि पीड़ित परिवार का भरोसा न्याय व्यवस्था पर बना रहे अगर न्याय मिलने का भरोसा कम हो जाता है तो किसी के भी मन में हताशा बढ़ सकती है जैसा कि बागपत के इस मामले में देखने को मिला।
परिवार का दर्द और सामाजिक प्रतिक्रिया
पीड़ित परिवार का दर्द समझा जा सकता है जब इंसाफ पाने के लिए वे घंटों थानों के चक्कर लगा चुके हैं और हर दरवाज़ा बंद लगता है तो उनका गुस्सा और निराशा स्वाभाविक है ऐसे समय में उचित सुनवाई और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है हालांकि प्रशासन ने बड़ी घटना को टाल लिया लेकिन यह स्पष्ट है कि न्याय न मिलने की निराशा कहीं भी खतरनाक रूप ले सकती है
बागपत में सामने आया यह मामला न्याय व्यवस्था पुलिस प्रतिक्रिया और पीड़ितों को मिलने वाले समर्थन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है आरोप चाहे किसी भी व्यक्ति पर हों न्याय की प्रक्रिया को निष्पक्ष और तेजी से आगे बढ़ाना समाज और कानून व्यवस्था की मजबूती का परिचायक है पीड़ित परिवार की निराशा और उनका आत्मदाह जैसा कदम उठाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है
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