दिल्ली शराब नीति घोटाला कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को CBI आरोपों से रिहा किया पूरा केस विवरण

NewsRohit
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दिल्ली शराब नीति घोटाला कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को CBI आरोपों से रिहा किया पूरा केस विवरण

दिल्ली के Excise Policy यानी शराब नीति घोटाला मामले में एक महत्वपूर्ण मुक़ाबला अदालत में नया मोड़ आया है राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी आरोपियों को CBI के आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया है यानी कोर्ट ने कहा कि CBI ने आरोप साबित करने के लिए ठोस न्यायसंगत सबूत पेश नहीं किए हैं इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट में CBI की चुनौती‑अपीली सुनवाई के तहत चल रहा है।

दिल्ली शराब नीति घोटाला
                                         दिल्ली शराब नीति घोटाला

मामले की शुरुआत और आरोप क्या थे?

दिल्ली सरकार की 2021‑22 आबकारी (Excise) नीति को लेकर CBI और ED ने आरोप लगाया कि उस नीति में अनियमितताएँ और भ्रष्टाचार (corruption) हुआ है आरोप के अनुसार नीति को कुछ बड़े शराब लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए बनाया गया जिससे राजस्व को नुकसान हुआ और नियमों का उल्लंघन हुआ हालाँकि इन आरोपों का कोर्ट में सही तरीके से सबूतों के साथ समर्थन नहीं मिला जिसके कारण कोर्ट ने आगे की कारवाई पर रोक लगाई।


ट्रायल कोर्ट का फैसला Discharge क्यों दिया?

राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष अदालत ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त (discharge) कर दिया कोर्ट ने कहा कि CBI की chargesheet में पर्याप्त ठोस सबूत नहीं थे और कई बिंदुओं पर आरोपों में prima facie (पहले नजर में) मामला साबित नहीं है इस वजह से मुक़दमा आगे नहीं बढ़ सकता CBI की chargesheet में कई खामियाँ विसंगतियाँ और सबूतों की कमी थी केजरीवाल के खिलाफ जो आरोप लगाए गए थे वे कोर्ट की मानकों के अनुसार विश्वसनीय नहीं थे सिसोदिया पर आरोपों के समर्थन में भी कोई ठोस सामग्री नहीं मिली कोर्ट ने विशेष रूप से यह भी कहा कि CBI ने ऐसा आरोप लगाया कि ऐसा लगता है मानो आरोपियों को बगैर मजबूत वजह के केस में खींचा गया हो।

                                  

क्या यह बरी (acquittal) है?

यह महत्वपूर्ण है कि discharge और acquittal दो अलग चीज़ें हैं Discharge का मतलब है कि कोर्ट ने कहा कि chargesheet में पर्याप्त सबूत नहीं हैं और इसलिए मुक़दमा आगे नहीं बढ़ेगा यह सीधे तौर पर बिरोध (acquittal) नहीं है बल्कि प्रारंभिक जांच में ही मामला कमजोर माना गया Acquittal वह होता है जब मुक़दमे की सुनवाई पूरी हो चुकी हो और आरोपी को अदालत बरी कर दे कभी‑कभी discharge के बाद मामले में फिर से charges framing या हाई कोर्ट की सुनवाई हो सकती है जो इस केस में हो रहा है।


CBI की चुनौती और हाई कोर्ट की सुनवाई

CBI ने ट्रायल कोर्ट के discharge आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है एजेंसी ने 974 पन्नों की अपील दायर की है जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत और perverse यानी न्याय के विपरीत बताया है CBI का कहना है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं और अदालत ने उन पर ध्यान नहीं दिया दिल्ली हाई कोर्ट ने इस अपील पर केजरीवाल सिसोदिया और अन्य आरोपियों से जवाब मांगा है और इस मामले की सुनवाई जारी रखी है कोर्ट ने निचली अदालत के कुछ observations पर भी रोक लगाई है यह कहकर कि वे prima facie erroneous यानी पहली नज़र में गलत लगते हैं इसके अलावा ED भी उच्च न्यायालय में trial court के remarks को हटाने के लिए एक याचिका दायर कर चुका है जिसमें अदालत से आग्रह है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा ED के खिलाफ किए गए टिप्पणियों को हटाया जाए।


केजरीवाल और सिसोदिया का रुख

इस मामले में AAP और केजरीवाल‑सिसोदिया ने कहा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से रचा गया है उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की जांच में पक्षपात और राजनीतिक इरादे शामिल हैं कुछ खबरों के अनुसार दोनों नेताओं ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने मामले को एक impartial bench (निस्पक्ष बेंच) को सौंपने की मांग की है।


हाल ही का अपडेट (जमानत बांड भी जमा)

केजरीवाल और सिसोदिया ने इस केस में ₹50,000 के जमानत बांड जमा किए हैं यानी उन्होंने अदालत को भरोसा दिया है कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे यह कदम मुख्य रूप से हाई कोर्ट की जारी सुनवाई के मद्देनज़र है ताकि दोनों नेता कोर्ट की प्रक्रिया में शामिल रहें और आगे की तारीखों पर पेश हो सकें ट्रायल कोर्ट ने कानूनी मामले में शामिल लोगों को डिस्चार्ज किया CBI और ED ने इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी है हाई कोर्ट सुनवाई जारी रख रहा है अदालत ने कुछ टिप्पणियों पर रोक लगाई है और जवाब भी मांगा है मामले का अंतिम निर्णय अभी बाकी है  यह मामला अभी ख़त्म नहीं हुआ है बल्कि एक नए चरण में पहुँचा है ट्रायल कोर्ट के निर्णय ने आरोपियों को राहत दी है लेकिन CBI और ED के चुनौतीपूर्ण कदमों से उच्च न्यायालय में अब और विस्तृत सुनवाई हो रही है आगे के फैसले में यह तय होगा कि क्या यह मामला फिर से ट्रायल के लिए जाएगा या discharge को स्थायी रूप से मान लिया जाएगा।


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