हेनरी पर कानूनी जंग महुआ मोइत्रा पहुंचीं दिल्ली हाईकोर्ट
भारतीय राजनीति में अक्सर बड़े बयान और तीखी बहसें सुर्खियों में रहती हैं लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र एक पालतू कुत्ता हेनरी बन गया है तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने पालतू डॉग की कस्टडी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है यह Mahua Moitra Dog Case अब सिर्फ निजी विवाद नहीं बल्कि एक हाई-प्रोफाइल Pet Dog Custody Case के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है Mahua Moitra Dog Case?
हेनरी एक रॉटवीलर नस्ल का कुत्ता है कस्टडी विवाद तब शुरू हुआ जब महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व साथी के बीच संबंधों में दरार आई दोनों पक्षों का दावा है कि हेनरी की असली देखभाल उन्होंने की है और वही उसके सही संरक्षक हैं बताया जा रहा है कि पहले यह मामला निचली अदालत में गया जहां अंतरिम कस्टडी (Interim Custody) को लेकर राहत नहीं मिली इसके बाद Mahua Moitra Dog Case को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई यह विवाद मुख्य रूप से तीन सवालों पर केंद्रित है हेनरी का कानूनी मालिक कौन है उसकी नियमित देखभाल किसने की उसकी भलाई किसके साथ बेहतर सुनिश्चित होगी सूत्रों के अनुसार पहले साकेत कोर्ट में Pet Custody Case के तहत आवेदन दाखिल किया गया था अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर तत्काल कस्टडी देने से इनकार कर दिया यही कारण रहा कि मामला आगे हाईकोर्ट तक पहुंचा अब दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर दोनों पक्षों से जवाब मांगा है महुआ मोइत्रा की ओर से दलील दी गई है कि हेनरी से उनका भावनात्मक जुड़ाव गहरा है और उसकी देखभाल का बड़ा हिस्सा उन्होंने संभाला है कोर्ट आने वाले दिनों में दस्तावेज मेडिकल रिकॉर्ड और देखभाल से जुड़े सबूतों की जांच कर सकता है।
Pet Dog Custody Case में कानून क्या कहता है?
भारत में पालतू जानवरों को कानूनी रूप से संपत्ति (Property) की श्रेणी में माना जाता है लेकिन अदालतें अब Animal Welfare और भावनात्मक पहलुओं को भी महत्व देने लगी हैं कस्टडी तय करते समय अदालत इन बातों पर विचार कर सकती है डॉग की नियमित देखभाल कौन करता था टीकाकरण और मेडिकल खर्च किसने उठाया?रहने का वातावरण कहां ज्यादा सुरक्षित और स्थिर है पालतू के साथ भावनात्मक जुड़ाव कितना मजबूत है इस तरह के Mahua Moitra Dog Case जैसे मामलों में अदालत का उद्देश्य सिर्फ मालिकाना हक तय करना नहीं बल्कि जानवर की भलाई सुनिश्चित करना होता है।
क्यों चर्चा में है यह हाई-प्रोफाइल डॉग केस?
यह मामला इसलिए ज्यादा सुर्खियों में है क्योंकि इसमें एक राष्ट्रीय स्तर की नेता शामिल हैं सोशल मीडिया पर HenryDogCase और #PetCustodyCase जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे हैं लोगों की राय बंटी हुई है कुछ इसे निजी मामला बता रहे हैं जबकि कई इसे भारत में बढ़ते Pet Custody Rights के संदर्भ में देख रहे हैं शहरी भारत में पालतू जानवर अब परिवार का हिस्सा माने जाते हैं और रिश्तों में दरार आने पर उनकी कस्टडी भी विवाद का कारण बन सकती है अब सबकी नजर दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है अदालत दोनों पक्षों के तर्क दस्तावेज और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला देगी संभव है कि कोर्ट साझा कस्टडी (Shared Custody) का विकल्प भी देखे ताकि हेनरी की भलाई सुनिश्चित की जा सके यदि अदालत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है तो यह Pet Dog Custody Case भविष्य के मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
भावना अधिकार और कानून
हेनरी का यह मामला केवल एक पालतू कुत्ते की कस्टडी तक सीमित नहीं है यह बदलते सामाजिक मूल्यों और कानूनी सोच को भी दर्शाता है आज पालतू जानवर सिर्फ शौक नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह देखे जाते हैं।महुआ मोइत्रा का दिल्ली हाईकोर्ट जाना इस बात का संकेत है कि जब भावनात्मक जुड़ाव और अधिकारों का टकराव होता है तो कानूनी समाधान ही रास्ता बनता है
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