12 साल की उम्र में शादी से आज़ादी जोधपुर की बेटी ने कोर्ट में जीतकर बेड़ियाँ तोड़ी

NewsRohit
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12 साल की उम्र में शादी से आज़ादी जोधपुर की बेटी ने कोर्ट में जीतकर बेड़ियाँ तोड़ी

भारत में आज भी कई बेटियाँ उन फैसलों के बोझ में जीती हैं जिनका उन्होंने खुद कभी चुनाव नहीं किया इसी कड़ी में राजस्थान के जोधपुर से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है एक लड़की जिसने सिर्फ 12 साल की उम्र में जबरन शादी की बेड़ियों में बंधी ज़िंदगी से आज़ादी पाई है यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है बल्कि उन सभी लड़कियों की आवाज़ बन गई है जो अपने बचपन और अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं। 

12 साल में शादी, 21 में आज़ादी
                                            12 साल में शादी 21 में आज़ादी

12 में शादी और 21 में आज़ादी बाल विवाह एक अवैध लेकिन जारी प्रथा

भारत में बाल विवाह अवैध है कानून के तहत यदि किसी लड़की या लड़के की शादी उनके शादी योग्य उम्र से पहले होती है तो वह वैध नहीं मानी जाती और उसे मान्यता रद्द की जा सकती है बाल विवाह का प्रभाव केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक सामाजिक और आर्थिक रूप से भी व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी प्रभावित करता है यही असर इस लड़की ने भी महसूस किया जब यह लड़की मात्र 12 साल की थी तब उसे और उसके परिवार को शायद अपनी बच्ची की सुरक्षा और भविष्य के बारे में सोचना था लेकिन शादी कर दी गई उस उम्र में बचपन की किताबें खेल और सपने उसके लिए रह गए केवल यादें समय के साथ उसके मन में सवाल उठने लगे क्या मैं अपनी इच्छा के बिना किसी फैसले में बंधी रह सकती हूँ और जब वह बड़ी हुई उसने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय लिया।

कोर्ट में जीत प्रियंका की कहानी से उठती है हर लड़की की आवाज़

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैमिली कोर्ट ने उसकी शादी को रद्द (annulled) कर दिया जिससे उसने खुद को उन बेड़ियों से आज़ाद कर लिया जो उसके बचपन में उसे बाँध रही थीं कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ उसकी ज़िंदगी बदलने वाला रहा बल्कि यह कानूनी मिसाल भी बन गया है इस जीत ने दिखा दिया कि कानून की शक्ति और हिम्मत मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं इस लड़की की story अब सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों में वायरल हो रही है कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उसके कदम ने सामाजिक चेतना जगाई है खासकर उन इलाकों में जहां बचपन में शादी होने की प्रथा अब भी जड़ जमाए बैठी है जोधपुर के इस केस ने न सिर्फ उसके लिए एक नई ज़िंदगी शुरू की है बल्कि देशभर के उन परिवारों को भी सोचने पर मजबूर किया है जो आज भी बाल विवाह को स्वीकार कर लेते हैं।

इस जीत का समाज पर बड़ा असर

लड़कियाँ अपनी आवाज़ उठाएं और न्याय के लिए खड़ी हों तो सामाजिक रूढ़िवाद भी बदल सकता है यह जीत न सिर्फ एक लड़की की बल्कि उन सभी परिवारों और समर्थकों की है जो बाल विवाह के खिलाफ लड़ रहे हैं साथ ही इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि भारत में कानून कमजोर नहीं बल्कि लागू होने की आवश्यकता है और आज यह लड़ाई एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है जोधपुर की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि ज़िंदगी चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो हिम्मत और न्याय के लिए संघर्ष सही दिशा में चलने पर जीत ज़रूर मिलती है 


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